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अजी-नो-मोटो® मूलभूत जानकारी
अजी-नो-मोटो® का जन्म
डॉ. आइकेडा ने पहली बार पश्चिमी भोजन का सेवन जर्मनी में किया
जापान के वैज्ञानिक डॉ किकुने आइकेडा जापान के टोकियो इम्पीरियल विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद भौतिकशास्त्र के अध्ययन के लिए दो साल जर्मनी में रहे। उस दौरान विभिन्न खाद्य पदार्थों के स्वादों के प्रति उनकी रुचि बढ़ी। वहाँ उन्होंने पहली बार टमाटर, चीज़, मांस, और शतावरी जैसे खाद्य पदार्थ चखे।
उस समय वैज्ञानिकों का मानना था कि मूल स्वाद केवल चार हैं । परन्तु डॉ. आइकेडा ने अनुभव किया कि इन चार मूल स्वादों के अतिरिक्त एक अनोखा स्वाद भी हो सकता है।

डॉ. आइकेडा ने एक सामान्य स्वाद उमामी की खोज की।
ये 1912 में शिकागो में आयोजित प्रयोगात्मक रसायनशात्र के आठवें अंतर्राष्ट्रीय काँग्रेस में दी गयी उनकी प्रस्तुति का अंश है। यह अंश उनके उस समय के विचारों को व्यक्त करता है, जब वे जर्मनी में थे।

उमामी: एक सामान्य स्वाद
एक जागरुक आस्वादक शतावरी, टमाटर, चीज़ और माँस जैसे जटिल स्वाद वाले खाद्य पदार्थों में एक समान-स्वाद का अनुभव करेगा जो बहुत ही अनोखा है और उसे मीठा, खट्टा, नमकीन और कड़वा जैसे चार स्वादों के अंतर्गत वर्गीकत नहीं किया जा सकता।
(प्रयोगात्मक रसायनशास्त्र पर आठवीं अंतरराष्ट्रीय काँग्रेस, शिकागो, 1912 में डॉ. के. आइकेड़ा की प्रस्तुति)
वे दो वर्ष जर्मनी में रहने के बाद जापान लौटे। उन्होंने गौर किया कि चार मूल स्वाद मीठे, खट्टे, नमकीन और कड़ुए से भिन्न एक अपरिचित स्वाद-गुण स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। उन्होंने यह स्वाद जापान में परंपरा से भोजन में लिये जा रहे, समुद्री सूखी घास-कोंबु के शोरबे में स्पष्ट रुप से खोज निकाला।
इसके पश्चात 1908 में उन्होंने सूखे कोंबु के संघटकों की खोज की और खोज निकाला कि यह स्वाद उसमें रहे ग्लूटामेट के कारण है। इस स्वाद को उन्होंने उमामी नाम दिया।


कोंबु से ग्लूटामेट के विच्छेदन के उनके प्रयोग के दौरान उन्होंने डॉ. हिज़ू मियाके एम.डी. का भोजन और पाचन प्रपत्र पढ़ा। वे डॉ. हिज़ू मियाके के इस अभिप्राय से प्रभावित हुए कि अच्छा स्वाद पाचन क्रिया में सहायक सिद्ध होता है। उमामी स्वाद की खोज के पश्चात उन्होंने ग्लूटामेट पर आधारित एक नया स्वादिष्ट उत्पाद विकसित करने का प्रयास किया।
अजी-नो-मोटो® के व्यापार की शुरुआत
डॉ. आइकेड़ा उमामी स्वाद द्वारा जापानियों के भोजन में पोषकता की मात्रा बढ़ाने में विश्वास रखते थे और वे उस पोषक पदार्थ का एक सामान्य घरेलू खाद्य पदार्थ के रूप में प्रचार करने की आवश्यकता के प्रति जागरूक थे। उन्होंने अपनी योजना को व्यावसायिक रूप दे कर साझेदारी में व्यापार करने के उद्देश्य से आयोडिन के उत्पादन से जुड़े श्री सबुरोसुके सुज़ुकि से संपर्क किया। पेटेंट प्राप्त करने के एक वर्ष बाद 1909 में अजी-नो-मोटो®विश्व में उमामी स्वाद देने वाले सबसे पहले उत्पाद के रूप में बेचा गया।

प्रारंभिक बिक्री के लिए विज्ञापन की एक अनोखी रणनीति

जब बिक्री प्रारंभ हुई तब अजी-नो-मोटो® की बिक्री बढ़ाने वाले श्री सबुरोसुके के पुत्र श्री सबुरो केवल 19 वर्ष के थे। समाचार पत्रों में विज्ञापन देने जैसी पारंपरिक पद्धतियों से असंतुष्ट, सब्युरो ने बिक्री के लिए विविध रणनीतियाँ अपनायीं। घोड़ा गाड़ी पर विज्ञापन, जिसे कई लोगों ने अपनाया था, ये आज के ट्रेन पर विज्ञापन (नकाज़ुरी कोकोकु) का मूल स्रोत है। आगे जब उत्पाद के नमूने कम थे तब उन्होंने उसे छोटी बोतलों में भर कर वेडिंग मशीन द्वारा बेचा। उन्होंने देश भर में घूमने वाले औषधि विक्रेताओं की मदद से तथा देश भर में व्यापक विक्रय द्वारा बिक्री बढ़ायी। इसके अतिरिक्त फुटकर दुकानों से उत्पाद बेचने के लिए उन्होंने बैंड-बाजे के साथ देश भर में भ्रमण किया। वे "रोड स्टेंप्स" अर्थात् सड़क पर लिख कर विज्ञापन करने के भी सजृक थे। सड़क पर चॉक से लिखे उनके विज्ञापन "शोरबे का बादशाह - अजी-नो-मोटो" (दाशी नो ओयाडामा - अजी-नो-मोटो) ने आम जनता की रुचि को उद्वेलित किया।
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| रेल विज्ञापन | |
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| सड़क पर अंकन | बैण्ड बाजे के साथ मार्चिंग |
प्रारंभ से ही विदेशों में विक्रय के लिए बल देना
प्रारंभिक विक्रय के एक साल के अंदर ही श्री सबुरोसुके सुज़ुकि ने अजी-नो-मोटो® का विक्रय ताईवान और कोरिया में प्रारंभ कर दिया, यह दृढ़तापूर्वक साबित करने के लिए कि अजी-नो-मोटो® वास्तव में एक अंतर्राष्ट्रीय खोज है। उत्पाद की बिक्री उनके पूर्वानुमान से भी अधिक हुई। यह उत्पाद शीघ्र ही खाद्य पदार्थों की दुकानों, रेस्तरां और सामान्य जन के घरों में लोकप्रिय हो गया। इसने श्री सबुरोसुके के पुत्र श्री सबुरो सुज़ुकि को चीन के दौरे पर जा कर वहाँ बिक्री शुरु करने के लिए प्रेरित किया। 1916 में शंघाई में शाखा कार्यालय स्थापित किया गया। आने वाले वर्षों में बिक्री एशिया से भी आगे बढ़ी और यहाँ तक कि न्यूयोर्क में कार्यालय स्थापित किया गया। उमामी स्वाद द्वारा विश्व के आहार को बेहतर बनाने का निरंतर प्रयास आज तक चल रहा है।
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| चीनी में पोस्टर | अंग्रेजी में पोस्टर |

वर्तमान में सौ से अधिक देशों और क्षेत्रों में विक्रय




